मुझे तलाश है एक आवारे की,

मुझे तलाश है एक बनजारे की,

मुझे तलाश है एक टूटे तारे की,

मुझे तलाश है एक बेकारे की,


तलाश में हूं कुछ मिट्टी की।

वो सावन की भीगी चिट्ठी की।।

तलाश में हूं दो आंखों की ।

वह गहरी गहरी सांसों की।।

देखो तलाश कहां तक जाएगी ।

या रास्ते में मिट जाएगी ।।

यह समय की बहती धारा में।

कुछ डूबेगी कुछ उतरायेगी ।।

सृष्टिमें बहुत चुनिंदा हूं ।

लेकिन खुद पर शर्मिंदा हूं ।।

मैं उठता आजाद परिंदा हूं ।

खुद की तलाश में जिंदा हूं।।


मुझे खुद की तलाश है।


-अविनाश त्रिवेदी