इतिहास के परिपेक्ष्य में मूर्ति को स्थापत्य कला से और उपासना से जोड़ कर देखा जाता है और पूजा शब्द से प्रायः यह अर्थ लगाया जाता है कि धार्मिक अनुष्ठान से संबंधित कुछ है परन्तु पूजा शब्द का वास्तविक अर्थ आस्था रखते हुए किसी के सम्मान करने से है। दोनों शब्दों को मिलाकर यह अर्थ स्पष्ट है कि यदि किसी में आस्था रखते हुए सम्मान देना है तो एक प्रतीक आवश्यक है और मूर्ति उसी प्रतीक का स्थान लेती है। उदाहरण के लिए हम सभी अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, प्रतीक के रूप में माता-पिता हमारे समक्ष है अर्थात हम उन्हें देख सकते हैं ठीक इसी प्रकार ईश्वर की भी परिकल्पना की गई है और वह निराकार नहीं हैं। उनके ही प्रतीक के रूप में हम लोग मूर्ति का निर्माण करते हैं उसे एक आकार प्रदान करते हैं और फिर उसकी पूजा की जाती है।
प्रश्न - बहुत सारे पंथ हमेशा यह प्रश्न करते हैं कि हिन्दू धर्म में मूर्ति पूजा क्यों?
उत्तर - सकारात्मक दृष्टिकोण से देखें तो यह है कि उपासना के लिए प्रतीक का होना जरूरी है और मूर्ति वह प्रतीक है जो ईश्वर और मनुष्य के मध्य संबध स्थापित करती है।
प्रश्न - ईश्वर की उपासना क्यों?
उत्तर - अग्नि, जल, वायु, सूर्य, वनस्पति, पृथ्वी सबकी पूजा का विधान हिन्दू धर्म में है क्योंकि जिनके कारण मानव जीवन संभव है उसके प्रति कृतज्ञता का भाव हमारे मन में होना चाहिए। हम सभी अपने माता-पिता के प्रति जीवन भर कृतज्ञ रहते हैं क्योंकि उनके कारण ही अपना जीवन संभव हुआ और जीवनपर्यंत मनुष्य उनका ऋणी रहता है। ठीक इसी प्रकार जिनके कारण मानव जीवन सभंव हो पाता है उसके प्रति कृतज्ञता का भाव होना ही चाहिए।
अगर अग्नि न होती तो भोजन पकाते कैसे और फिर खाते क्या
जल न हो तो जीवन की परिकल्पना अधूरी है
वायु न हो तो श्वसन नहीं और श्वसन न हो तो जीवन नहीं
वनस्पति न हो तो प्राण वायु (oxygen) का निर्माण संभव नहीं
धरा नहीं तो फिर जीवन ही नहीं
सूर्य नहीं तो उर्जा का स्रोत नहीं
इसी कारण सूर्य देवता, अग्नि देवता, वायु देवता इनकी उपासना आवश्यक है।
प्रश्न - हिन्दू लोग नागपंचमी पर नाग को क्यों पूजते है जबकि नाग मनुष्य को हानि पहुंचता है?
उत्तर - हमारे यहां सबको सम्मान प्राप्त है चाहे वह पशु हो पक्षी हो कीड़े-मकोड़े हो मनुष्य हो क्योंकि हम जीवन का सम्मान करते हैं और नाग भी आहार चक्र (food chain) का अभिन्न अंग है। अगर हम उसे समाप्त करना चाहेंगे तो आहार चक्र में बाधा उत्पन्न हो जायेगी।
विज्ञान ने भी Higgs boson को God Particle माना है धार्मिक दृष्टि से देखिए तो बात वही है कि कण-कण में ईश्वर का वास होता है।
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-श्रीवास्तव_गौरव


