माँ के कष्टों पर जो लड़का रो सकता है,
घर के कारण जो प्रेयसी को खो सकता है !!
प्रणय संबधों की देहरी पर वो भी सबको को याद करेगा,
कुछ पायेगा कुछ खोयेगा व्यर्थ में वाद विवाद करेगा !!
सुन कर जो ताने अपनों के विष सा आंसू पी सकता है,
प्रणय वेदना में वो लड़का मर कर भी जी सकता है !!
मां के ममता का आंचल कोई छोड़े भी तो कैसे,
जिसने वर्षों तप किये हो सावित्री के जैसे !!
कली टूट कर पौधे से सांसे ले भी कैसे,
लक्ष्य भेदन में नयन दिखे है कौन्तेय के जैसे !!
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- श्रीवास्तव गौरव
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