बात क्या सही है और क्या गलत है इससे ज्यादा जरूरी यह हो गया है कि हमारे सोचने के हिसाब से क्या सही है और क्या गलत है इसके आधार पर निर्णय लिया जाता है। लेकिन वह निर्णय सबके दृष्टिकोण से सही होगा इसकी संभावना बहुत कम है। फिर भी निर्णय करते समय तार्किक दृष्टिकोण का होना आवश्यक है और उसके पक्ष-विपक्ष पर चिंतन भी आवश्यक है। 


इन सब बातों में कोई Rocket Science का formula काम नहीं करता है, जो कोई बात किसी भी व्यक्ति के सोच से मेल खाती है वह उसके लिए सुख का कारण है और जो कोई बात व्यक्ति के सोच से मेल नहीं खाती वह उसके लिए दुःख का कारण है।

 सीधा अर्थ यह है कि जिसको मन स्वीकार कर ले वह सुख है और जिसको मन अस्वीकार कर दे वह दुःख है।

 इस सुख और दुःख के बीच जो अन्तर उत्पन्न हुआ उसमें उत्प्रेरक है मन

सबके अन्दर कुछ अच्छाईयां है और कुछ बुराईयां है परन्तु यह तो व्यक्ति के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है कि वह अच्छाईयों को देखता है या फिर बुराईयों को क्योंकि सामने बुरा-भला कहने वाला उन लोगों से तो ठीक ही है जो पीठ पीछे बुराई करते हैं ‼️

रेस में पहुंच कर घोड़ा दौड़ाना आसान है पर उस घोड़े को रेस में दौड़ने लायक बनाना अत्यंत कठिन है ‼️


-------------------------- © श्रीवास्तव_गौरव