दिन ढलता है और..........

शाम होती है, धीरे-धीरे चांद निकलता है......

घर से निकलकर पूरा फलक पर आ जाता है....

देखते ही देखते रात होने लगती है.....



यादों की बारात और बिन मौसम बरसात....

दर्द भरी रातें और ढेर सारी बातें.....

एक गुमनाम रास्ता और खुद से वास्ता...

तकलीफ के पल और मोती जैसा जल....


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फरवरी में सिंतबर वाला मानसून कहाँ से लाओगे,

करवा चौथ के पानी वाला सूकून कहाँ से लाओगे..!!

लाख दिखा लो इस फरवरी में इज़हार - ए- मुहब्बत,

पहली मुलाकात वाला जूनून कहाँ से लाओगे.......!!


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- - - - - - - - - - - - - - - - - - - - श्रीवास्तव गौरव