चक्रव्यूह में फंस गये, यश भी ना बचा सके,
रेत सा फिसल गया, कुछ भी ना पा सके ॥
वक्त भी ठहर गया, पलक भी झुकी नहीं,
यादों के सावन की, झड़ी भी रूकी नहीं ॥
बोल भी न पाये कुछ, बात सब हो गई,
पंक्षी भी चहक उठे, रात भी सो गई ॥
और हम अधीर से, कुछ भी ना खा सके,
चक्रव्यूह में फंस गये, यश भी ना बचा सके ॥


