तेरे चेहरे से जुल्फों की लटें हटा सकूं
तू चादंनी सी कयामत ढा रही है यह बता सकूं
तेरी अंगडाईयां भोर तलक मेरी बांहों में गुजरे
मैं यह किस्सा किसी को जाकर सुना सकूं
तेरे चेहरे से जुल्फों की लटें हटा सकूं....
तुम नींद में थी और मैं जाग रहा
जैसे शाम में सूरज चन्दा को निहार रहा
तेरी एक करवट से बदला पूरा नज़ारा देखो
जैसे अमावस की रात में केवल तारा देखो
श्रीवास्तव गौरव


