माथे मोर -मुकुट है,

गले वैजयंती माल,

कर मे बंसी साजे,

गोविंदा नंदलाल।


टेढ़ों -सो मुकुट है,

काले घुंघराले बाल,

मुख में ब्रह्मांड दिखावे,

गोविंदा नंदलाल।


भौंहन से खेल की है,

प्यारी-सी है मुस्कान,

नैनन से है रिझावे

गोविंदा नंदलाल।


तन पीत वस्त्र धारे,

आंखे हैं बाण समान,

राधा संग रास रचावे,

गोविंदा नंदलाल।


माथे पे तिलक सुहाए,

पग हैं पुष्प समान,

कैसे रास ना आए!

गोविंदा नंदलाल।



~ अर्पित श्रीवास्तव