ये जरूरी तो नहीं
हर समंदर का साहिल हो
ये हसरत अधूरी तो नहीं ,
सबकी उड़ान को खुला आसमान मिले
ये जरूरी तो नहीं,
समंदर अपनी प्यास बुझाने को कुआं ढूंढे
कहीं ये मजबूरी तो नहीं,
हर मुसाफिर को अपनी मंजिल मिले
ये जरूरी तो नहीं,
सबको अपना समझ लेना
ये आदत बुरी तो नहीं,
उसकी हर इबादत में तेरा नाम मिले
ये जरूरी तो नहीं,
चांदनी रात में सबको चांद मिले
ये ख्वाहिश पूरी तो नहीं,
तेरे हर सवाल का जवाब मिले
ये जरूरी तो नहीं ।।
- साहिल राय


