तथागत का भी है स्वागत, गाँधी की भी चल रही है आँधी, सुभाष-भगत होंगे नेपथ्य में, मिट गई है ये भ्रांति भी। सत्याग्रह का शोर भी है, मुखर हो गई है सशस्त्र क्रांति ही। अहिंसा की जहां उपज अशांति, हिंसा से वहीं स्थापित शांति भी। घात सहें, न करें प्रतिघात; बदल गई है ये किवदंती भी।