जब उम्र सारी ढल गई,
दस्त खाली आए नजर, आखिरी आया सफर अब, मेरे साथ चल आवारगी। दफ्न है दिल में राज गई, कैसे बयां हो आवाज गई, वो हंस रहा मेरे हाल पर, मेरा रंग दिखा आवारगी। उसे देख दम में दम आया, रकीब संग वो हमकदम आया, उसे मिल गया साथ औरों का, मेरा साथ देना आवारगी। तू मुझमें क्यों दाखिल हुआ? तुझे मुझसे क्या हासिल हुआ? मैं खूद पे खाता हूँ तरस अब, तू अपनी भूल बता आवारगी । दरख्तों से मैं लिपटा रहा, अपने में सिमटा रहा, सब गांव हो गए शहर, मैं बिखर गया आवारगी।

