बस कुछ घड़ियां और सब ठीक हो जाएगा ,

यह जो तेरे हृदय का विषाद है कल यूहीं मिट जाएगा ।

समय की सिर्फ बात है , हम सबने कितनी ही लड़ाइयां लड़ी,

साथ ही तो जीत जाएंगे , हिम्मत हो तो कौन मुश्किल बड़ी ।डटकर लड़ रहे कलियुग के देवता , हर पल करते कल्याण ,

सफेद कोट और खाकी पहनें जैसे घूम रहे भगवान ।

माना कुछ कमी है पर तुम अकेले कहां, झूज रहा पूरा संसार

साथी बस तुम हाथ बढ़ाना कल फिर भर जाएंगे भंडार ।

मन मिलन को तरसता हररोज , कुछ और पल बस मेरे मीत,

देखना कल फिर कलम लिखेगी , जिद्दी मानव फिर गया जीत ।

जब कल शहर खुलेगा , बस भूलना मत कभी जो मिला ज्ञान,

गलत थे कहीं पर आगे याद रखेंगे प्रकृति से कौन बलवान।