जिसको बनना था अभियन्ता वो बन बैठा है किसान 


ये वक्त का है तकाजा और बेरोजगारी का है निशान 


जहां प्रतिभा पलायन करने को बनाया गया संविधान 


वहां बुद्धिजीवियों को मिलना बहुत मुश्किल है सम्मान