ये सिर्फ एक रोग है, कोई श्राप नहीं,
कोई पिछले जन्म का पाप नहीं,
न ही इसके रोगी कोई अभिशप्त हैं,
वो भी इंसान है समाज का हिस्सा हैं,
बीमारी किसी कोई भी हो सकती है, कभी भी
हो सकती है और कोई भी हो सकती है,
कोई भी बीमारी हमारे कर्मो का फल
नहीं होती, हमारे पाप-पुण्य का लेखा जोखा नहीं होती,
किसी को छूने से कोई बीमारी नहीं फैलती,
अगर आप साफ नियत से किसी की मदद करो तो,
आप हमेशा स्वस्थ ही रहोगे,
मेरी कुछ पढ़े लिखे पर दकियानूसी सोच रखने वालों
से हाथ जोड़ के निवेदन है, अगर आप किसी का
दर्द कम नहीं कर सकते तो उसे बढाइये भी नहीँ,
किसी को हौंसला भले ही न दो, पर किसी की हिम्मत भी
मत तोड़ो....
इंसान वही जो कर्म करे, फल तो बाजार में भी मिल जाते हैं....