मेरे मौला मेरी मोहब्बत मेरा ईनाम करदे, न लम्हे वस्ल के खत्म हों ऐसा इंतिज़ाम करदे, दो पल को ठहरे वक़्त,दीदार-ए-हुस्न होता रहे, ए खुदा इतना बरस रंगीन शाम करदे। ________ कभी न जिसका अंत हो, ऐसी किताब करदे, इतनी मोहब्बत बरसादे इश्क़-ए-सैलाब करदे, वो मेरी ग़ज़ल हो,और उसका ग़ालिब मैं, ख़ुमार उसकी आँखों का मेरी शराब करदे। ___________ मेरे मौला मेरी मोहब्बत मेरा ईनाम करदे, ना लम्हे वस्ल के .......