Poetry 1 min read 797.4K reads

Zimmedaari


ज़िम्मेदारियों की बात ना करोसाहब,

हर सुबहकाँधो पे ख़्वाबों के बोझ लिये

ज़िन्दगी के पत्थरों से भरी गलियों से,ठोकरें खा के गुज़रता हूँ मैं।

Read more Earn more Learn more