ख़ुद से पराये जी रहे हम,
तेरे जाने बाद तेरी यादों
के सहारे जी रहे हम,
तू अंजान हुईं
और मैं बेजान,
बस अब जिंदगी के
तन्हा और बेचैनी को
कमाये जी रहे हम।


ख़ुद से पराये जी रहे हम,
तेरे जाने बाद तेरी यादों
के सहारे जी रहे हम,
तू अंजान हुईं
और मैं बेजान,
बस अब जिंदगी के
तन्हा और बेचैनी को
कमाये जी रहे हम।