जब धरती धूप में जलता हैं
तब वो नंगे पांव चलता हैं
उसे आराम करते नहीं देखा,
वो अपने खेतों से ना मिले
तो उसे उसकी यादें खलता हैं
वो अपने फसलों को अपना
जहाँन कहते है
उसे बारिशों और तूफान से
डरते नहीं देखा,
जिसे भारत माँ महान और
धरती माँ किसान कहते हैं


जब धरती धूप में जलता हैं
तब वो नंगे पांव चलता हैं
उसे आराम करते नहीं देखा,
वो अपने खेतों से ना मिले
तो उसे उसकी यादें खलता हैं
वो अपने फसलों को अपना
जहाँन कहते है
उसे बारिशों और तूफान से
डरते नहीं देखा,
जिसे भारत माँ महान और
धरती माँ किसान कहते हैं