सिलसिला रंगो का
मै गोरी तू काला,कब तक चलेगा ये सिलसिला,
क्यू ये रंग करवाता है, रिश्तों के बीच फासला।
ना जाने कितने दिल टूटने,की वजह है ये रंग,
बड़ी बेदर्द है ये, किया है कितनो की खुशियों को भंग।
करते है गोरे रंग को ही, क्यू पसंद सब,
कैसे समझाऊं तुम्हे ,दुख देना बंद करो अब।
परवाह नहीं अब ज़माने कि,मुझमें बहुत है खूबियां,
गोरे काले का भेद कर,तुम लाख निकालो मुझमें कमियां।
उड़ूँग आसमानों
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