जज़्बात


Jazbaat is my creation which highlights how precious relationships of our life can make our world more beautiful. Friends, the family, our love are integral parts of our life which stay with us forever. Please watch the video below the poem for a soothing visual experience of this poem.




धड़कने जस्बात बान गए,कैसी तेरी यारी

कैसे समझाऊं इस दिल को,प्यार करके हारी प्यार करके हारी।


खुद से ज़्यादा चाहा तुझको, रब से ज़्यादा पूजा

मेरे तड़पते अरमानों मे,तेरे सिवा ना कोई दूजा।


याद आती है तेरी पल पल,याद आती है तेरी पल पल

कैसी ये बेताबी।

कैसे समझाऊं इस दिल को, प्यार करके हारी

प्यार करके हारी


गया सावन का मौसम, हरियाली है छाई


मोर पपीहा संग में नाचे, ऋत ये कैसी आयी


जुबां पर है खामोशी, जुबां पर है खामोशी

दिल में बज रही शहनाई

कैसे समझाऊं इस दिल को,प्यार करके हारी

प्यार करके हारी


वादा आज किया है तुमने,भूल तुम मत जाना

चाहे रास्ता रोके ज़माना,रिश्ता तुम ये निभाना


दिल से दिल का सौदा किया,दिल से दिल का सौदा किया

तुझ संग प्रीत लगाई

कैसे समझाऊं इस दिल को, प्यार करके हारी

प्यार करके हारी


धड़कने जस्बात बन गए,कैसी तेरी यारी

कैसे समझाऊं इस दिल को प्यार करके हारी

प्यार करके हारी