चल रहे हैं जिन रास्तों पे,
जाने क्यूँ अँधेरे मुझको रोके,
हाँ रोके,

रोक ना पायेगा...,
जाने कितना भी हो अंधेरा...,
इन अंधेरों से,डरती नहीं,
इस  से बड़ा हैं,हौसला मेरा...,
चल रहे हैं जिन रास्तों पे,
जाने क्यूँ  अँधेरे मुझको रोके,
हाँ रोके,

ये जो सवाल हैं पेचीदा बड़ा,
मुश्किलों ने क्यूँ मुझको हैं घेरा,
जिनसे भी मिलुं,उसने मुखौटा है ओढ़ा...,
भेद दूंगी मैं, वो हर चक्रव्यूह,
जो भी मेरे लक्ष्य के आगे हैं खड़ा...,

रोक ना पायेगा...,
जाने कितना भी हो अंधेरा...,
इन अंधेरों से,डरती नहीं,
इस  से बड़ा हैं,हौसला मेरा...,
चल रहे हैं जिन रास्तों पे,
जाने क्यूँ  अँधेरे मुझको रोके,

नहीं रुकूंगी मैं,
ना अब मुझको रोकना...|