लहरें हवॉओ सी लहराती रहती हैं, लेटे-लेटे अँगड़ाईयाँ लेती रहती हैं, कभी धीरे से तो कभी जोरों से, कभी ख़ामोशी से तो कभी शोरों से, कभी उड़ती सी हैं तो कभी बैठी सी, कभी रुकी हुईं तो कभी बहकी सी, रह रह कर देखो ना दिल के साहिल से टकराती रहती हैं लहरों सी यादें तेरी!