कोई मंज़िल को चलता है कोई मंज़िल को तकता हैकोई चलते ही थकता है कोई थक कर भी चलता हैमुकद्दर से जो हारा है मशक्कत से वो जीतेगाजो गलता है जो तपता है वही सोना निखरता है
कोई मंज़िल को चलता है कोई मंज़िल को तकता हैकोई चलते ही थकता है कोई थक कर भी चलता है
मुकद्दर से जो हारा है मशक्कत से वो जीतेगाजो गलता है जो तपता है वही सोना निखरता है