चाहूँ एक ऐसी मंजिल

जिसका न कोई ठिकाना हो

सफ़र हो एक खूबसूरत सा

बस साथ चलते जाना हो,


न फिक्र हो इस शाम की

न डर हो इन अंधेरों का

बस थाम कर यूँ हाथ तेरा

आगे बढ़ते जाना हो,


आगाज़ हो एक खूबसूरत सह़र का

जिसमें खुशियों का खज़ाना हो

रख कर काँधें पर सर तेरा

बस सपने बुनते जाना हो,


सफ़र हो एक खूबसूरत सा

बस साथ चलते जाना हो...।।