यूँ पँख पसारे ख्वाब मेरे
उड़ना चाहें बस अब उड़ना चाहें,
जी भर के अपनी यूँ मनमानियाँ
करना चाहें बस करना चाहें,
ना सुनना चाहें वो अब किसी की
ना देखना चाहें वो अब हकीकत ज़िन्दगी की,
ना मानना चाहें वो बंधन जमाने का
ना समझना चाहें वो अब खेल समय का,
यूँ पंख पसारे ख्वाब मेरे
उड़ना चाहें बस अब उड़ना चाहें...।।

