थोड़ी दूर चलता हूं फिर रुक जाता हूं कभी- कभी लगता है कि छोड़ दूं दुनियां के सारे रिश्ते नाते उससे किए हुए सारे वादे, इरादे मगर थोड़ी दूर चलता हूं फिर रुक जाता हूं इसका मतलब ये नहीं की मैं अकेलेपन से डरता हूं मगर उसे अकेला छोड़ने से डरता हूं इसीलिए थोड़ी दूर चलता हूं फिर रुक जाता हूं जब कभी भी ख्वाबों में उसका ज़िक्र आता है तो लगता है छोड़ दूं इस ख्वाब को अधूरा मगर थोड़ी दूर चलता हूं फिर रुक जाता हूं।
अक्सर मेरा दिल फुरसत में मूझसे पूछता है कि कहीं तुमने जो की वो मोहब्बत एकतरफा तो नहीं थी और जो उसने की कहीं वो वफा तो नहीं थी तो अपने दिल की इस बात को झुठलाकर थोड़ी दूर चलता हूं फिर रुक जाता हूं।


