जब से इंसान कैद हुआ है ,
प्रकृति का ज़र्रा - ज़र्रा खुश हुआ है ।
पक्षी खुले आसमान को बेखौफ नाप रहे हैं,
तो वही हमारी नदिया भी शुध्द बह रही है ।
हवाओं में अलग ही आनंद है,
पर इन सब में जो सबसे अधिक प्रसन्न है ,
वो है हमारी प्रकृति ओर हमारा पर्यावरण ।
- सोहा


