एक आजाद पक्षी है वो,

क्यों उसे पिंजरे में रखा है तुमने ?

जब मनुष्य आजाद हुआ,

तो वो बेजुबान क्यों नहीं?

जब हमें किसी की गुलामी पसंद नहीं !

तो फिर हम क्यों उन्हें अपना गुलाम बनाए बैठे हैं ?

उन्हें भी हक है ,

दुनिया देखने का,

जीवन जीने का ,

अपनी प्रजाति के साथ रहने का ,

और एक आजाद परिंदा बन घूमने का!


~ सोहा