आज फिर बारिश आई,
अपने संग कुछ प्यारे बिते पलो की याद लाई ।
बारिश में वो तेरे संग बाइक पर घूमना,
और फिर चाय की चुस्कियां लेना ।
जैसे कोई सपना सच होना सा था,
परियों वाली कहानी का एहसास सा था ।
वो शाम भी खूब हसीन सी थी ,
आखिर होती भी क्यों ना, तुम जो करीब थे और ना कोरनटाइन था।
अब तो बस यही आरजू हैं ,जल्दी से कोरोना खत्म हो ,
और फिर से चले हम यूँ ही कही दूर ।
।। सोहा ।।


