जो हक़ीक़त ना दिखा पाए,
वो पन्ने फाड़ आया हूँ,
कलम जो सच ना लिख पाए,
मैं उसको तोड़ आया हूँ,
सत्य की राह में आते हैं,
कई मुश्किल के पत्थर ही,
जो पत्थर मुझसे टकराए,
मसल कर फोड़ आया हूँ!
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जो बिकता नहीं है, वो अख़बार हूँ मैं!
शब्दों का शिकार, क़लमकार हूँ मैं!!
J K Gautam (Jiddi Jeetu)


