!पर्यावरण प्रक्रति और हम!


पेंड़ बचाने का जब तक मंत्र नहीं लेंगे!

स्वच्छ हवा का हम आनंद नहीं लेंगे,

नहीं रहेगा माँ धरती का आँगन हरा भरा,

पर्यावरण बचाने की जब सौगंध नहीं लेंगे!


चिड़ियाँ किस डाली गायेंगी,

पेड़ की छाँव कहाँ पाएँगी,

गूंजेगी कोयल की कूक कहाँ,

कहाँ से खाना दाना लाएँगी!


नन्ही चिड़ियों के जीवन कर अंत यहीं लेंगे,

पर्यावरण बचाने की जब सौगंध नहीं लेंगे!


सावन में झूले कैसे झुलेंगे,

पेड़ों पे गुल कैसे फूलेंगे,

छाँव तले मिलते थे जिससे,

वो पीपल का पेड़ कहाँ भूलेंगे!


धरा सजाने की शिक्षा जीवन पर्यन्त नहीं लेंगे,

पर्यावरण बचाने की जब सौगंध नहीं लेंगे!!

✍️ J K Gautam (Jiddi Jeetu)