जमीं के ये फरिश्ते हैं, यही भगवान हैं,
बिना इनके रसोई के, फीके पकवान हैं,
चीर छाती ये धरती की, खींच पाताल से पानी,
जो अनाज उगाते हैं, यही किसान हैं।
इंसान ही इंसान पर एहसान करते हैं,
जीवन की सारी हस्ती यहीं कुर्बान करते हैं,
भुखमरी से अगर कोई बचा सकता है दुनिया को,
ऐसा नेक काम सिर्फ किसान करते हैं।
बिना इनकी इनायत के निवाला कैसे जाएगा,
भूंखे पेट कोई षडयंत्र खेला कैसे जाएगा,
ये जमीं ही है घर इनका, आसमां सर की छतरी है,
देखतें हैं इन्हें घर से निकाला कैसे जाएगा।
:- J K Gautam (Jiddi Jeetu)


