जाति आधारित सत्ता थी,

विघटन कारी काम किए!


मुग़ल शासकों, अंग्रेजों के,

हम सालों साल ग़ुलाम रहे!


किया विभाजित जाति धर्म में,

आती किस को शर्म नहीं!


किस जाति पर गर्व कर रहे,

हैं कौन से ऐसे कर्म सही!


नज़रें थोड़ी नीचे करके,

अपने क़ाबू जज़्बात करो!


जातिवाद ने तोड़ा है हमें,

सोच समझ कर बात करो!


✍️ जे के गौतम “ज़िद्दी जीतू”

J K Gautam @ErJKGautam