न जाने क्यो ये उदासी आज फिर चारो ओर छाई है,
शायद आज फिर मुझे किसी अनजान अपने की याद आई है।
जागा था कोई रात भर जब हम चैन से सोये थे ,
ये हमारी माँ तो नही पर अपनी माँ के लिए,
लड़ रहा था कोई सरहद पर इस देश के लिए।
लगे लांछन उस पर कई पर देश की आन पर दाग ना उसने आने दिया यह सैनिक है यरो हर बार ,
हर वार पर 'भारत माता की जय' का नारा वो लगाता गया।
अनजान होते हुए भी अपनो के लिए ,
अपना घर छोड़ कोई सरहद पर रह रहा था ।
आई जब मुश्किल देश पर ,
गर्व से अपना सेना छल्ली करवाता गया,
जाते जाते भी माँ के दूध का क़र्ज़ चुकाता गया।
इनके शहीद होने के बाद सरकार ने दी घरवालों को शहिदी(चेक)...
शायद नेताओं के हिसाब से इस शहीदी ने किसी के पति बाप बेटे भाई की जगह ले ली।
नाम जब पहली बार सुना उसका टीवी पर और अखबार मे खबर आई ....
फिर उसके बाद सबने उसकी तस्वीर अपनी प्रोफाइल बनाई।
जरा उनसे पूछो जिनके दिल मे ही थी उनकी तस्वीर ,
अपनी जिंदगी को तिरंगे मे लिपटा देख क्या नही हुआ था उनका दिल चीर-चीर।
रोए नही घर वाले फिर भी क्यूंकि शहीद वह हुआ था,
आम मौत नही जनाब वो अपने देश के लिए,
तिरंगे मे लिपट कर दफन हुआ था।
अब प्रश्न यह है की माँ बच्चे पत्नी बहनों को संभालेगा कौन ,
इस भ्रष्ट सरकार की जेब से उनके लिए पैसे निकलेगा कौन।
इतना पढ़ने के बाद यदि नही भरी आपकी आँखे
तो आपका दिल मोम नही पत्थर है
क्यूंकि इस देश मे इन जवानो की स्थिति तो इससे भी बत्तर है।