जख्मों को उसके तुमने अभी देखा नहीं है शायद,
या शायद वो ज़ख्म दिए हो तुमने ही क्या ये सही नहीं है !

है तुम्हे कुछ मालूम नही ऐसा भी नही है,
फिर हो क्यों खामोश मगर ये बात कुछ नई है !

तुम तो हर बात पे चिलाना जानते हो,
तुम तो हर बात का बहाना जानते हो !

तो क्या हुआ अब आजादी की बात नही करनी है,
जब बात आए उस पे तो कोई बात नही करनी है !

कहने को तो है कई बातें पर बातें करना सिर्फ मुनासिब नही है,
हो आजाद इस जहां में वो जब सही मायनों में आजादी तभी है !