आग और पानी का भी क्या अजीबोग़रीब रिश्ता है!
दोनों एक दूसरे से बेतहाशा नफ़रत करते,
पर एक दूसरे के बिना तबाही मचा देते।
सोचिए गर कभी आग बुझ जाए,
क्या उस आग में दम न था?
या पानी बहुत गहरा था?
या फिर कभी पानी ही में उफान आ जाए?
वो तो जलता रिसता रहेगा।
न कभी ठीक से जल पाएगा,
न बुझ ही पाएगा...
...अपने सीने में जो आग दफ़न है,
वो जो कभी किसी
आवारा सी चिंगारी ने लगा दी थी,
उसी से लिपटा रहेगा।
पानी की सतह में बस
इक हल्का ज़लज़ला सा दिखेगा।
हाँ, ये वही आग तो दफ़न है!
आपने देखी है कभी?
...अपने सीने में झाँका है कभी?