एहसान करदो आज इन पर्दो से निकल आओ ।

जरा जोश में आओ जरा जोर दिखलाओ ।।

हरेक आँचल को खतरे में डाल

चल रहा है कारोबार ,

खेल रहे कुछ लोग यहाँ,

आज यहाँ कल और वहाँ

अपने अंदर की ताकत अपने को ही दिखलाओ ।

जरा जोश में आओ जरा जोर दिखलाओ ।।

शत्रु सीमा पार से ताक रहा है रातो में ,

हरेक सोते सैनिक पर गोले दाग रहा है रातो में ,

सैनिक कुर्बानी दे रहे आँधियारी उन रातो में

और तुम -२ जलसा मना रहे हो चांदनी इन रातो में

चलो, उठो और देखो इनको हाथ को आगे बढ़ाओ ।

जरा जोश में आओ जरा जोर दिखलाओ ।।

कहीं जाति रही कहीं धर्म रहा

बस इनके बीच तू फिरता रहा

जब आई देश को जरूरत तेरी

तू घरो के आँचल में छिपता रहा

उठ, चल, निकल,तैयार हो लकीरो को मिटा जाओ ।

जरा जोश में आओ जरा जोर दिखलाओ ।।