बोली मुझको धूप यों , ढूंँढ रहे क्यों छाँव ।काटे तूने पेड़ संँग , जंगल, नदिया, गाँव ।।✍©# सुरेन्द्र_कुमार_शर्माजयपुर (राजस्थान)मोबाइल 9314445539