बसंत ऋतू का आगमन है,
माँ शारदे को नमन है
नव कोपलें और हैं लताएं,
चहुँ ओर सृजन ही सृजन है
माँ शारदा की आराधना है,
और वीणा का वदन है
आभास सुमधुर हो रहा है,
मातृ चरणों का स्मरण है
आह्लाद के स्वर उठ रहे हैं,
हर्षित जल थल और गगन है
निश्छल हृदय अभिव्यंजना है,
शुभकामना है और नमन है