हमनें वतन की ख़ातिर,
अपनी जान गवाई है,
तुम रहों चैन से हमनें,
सीने पर गोली खाई है,
दुश्मन के घर में घुसकर,
कब हमनें पीठ दिखाई है,
चुन चुन कर सबकों मारा,
फिर सीने पर गोली खाई है।
सरहद की लाज़ बचाई है।
आकर देखों सरहद पर,
कितनों ने राखी बंधाई है,
न तिलक लगा माथे पर,
और सूनी पड़ी कलाई है।
क्रिसमस, लोहड़ी, दिवाली,
कब हमनें ईद मनाई है,
घर बार भूलकर हमनें,
वेरक में खुशियां मनाई है।

