मैंने अपने लाखों अरमानों ख्वाबों को मारा है
पर मैं कातिल नहीं
बस दो कदम दूर हूँ
वह आगे आगे और मैं उसके पीछे-पीछे
पर अभी कुछ हासिल नहीं
इस भागदौड़ भरी जिंदगी में थक कर रुक-सा गया हूं
हताश होकर वापस लौट जाऊं
इतना भी बुजदिल नहीं
मैंने अपने लाखों अरमानों ख्वाबों को मारा है
पर मैं कातिल नहीं।
अथाह उत्साह से भरा मन मेरा
मुझे नहीं कोई फिक्र चाहे उजड़े मेरा बसेरा
मैं इस खौफनाक मंजर से टकराकर मंजिल को पा ही लूंगा
कौन कहता है कि मैं इस काबिल नहीं
मैंने अपने लाखों अरमानों ख्वाबों को मारा है
पर मैं कातिल नहीं ।
" निशा "


