तलाक शब्द जहां नही वैसा हिन्दू धर्म है
औरत न बंधती सात जन्मों का बंधन है

जीवन के सच्चे कड़वे पल गुजरते चले
हँसते रोते गुजारती ये वर्षो का सफर है

तलाक होते मगर दिल नही टूट पाते है
रह रहकर पुराने रिश्ते याद आ जाते है

उसने भी तो तलाक का जहर पिया था
एकाकी जीवन मे बहुत सहन किया था

जो बुरा लगता था आज उसमे तर्क था
अभावो में झांका तो कीमत समझा था

पीछे मुड़ देखा उसी को अच्छा पाया था
जब देखा दिल ने सदा उसे ही चाहा था