सूर सूर सम जानिए सूर छाये चहुँ ओर।
पुष्प खिलता निर्धन घर महके चहुँ ओर।
बालपन से कृष्णभक्ति ज्योत जगा रहे।
महाप्रभु मन भाए दीक्षा ले हरिगुण गाए।
बालरूप श्रीकृष्ण छवि दिल मे बसा बैठे।
रूचि जागी कृष्णभक्ति में हरिपद सुनाए।
जन्मांध सूरदास बचपन में गृह त्याग बैठे।
सूरदास नदी किनारे बैठ पद लिखते गए।
बाललीला शृंगार रस सजीव रूप बखाने।
साक्षात दर्शन सम भक्तिरस बखानते रहे।
बालरूप नंदलाल को भक्ति से रीझा रहे।
भक्तिकाल में सूरदास अखंड कीर्ति पाए।
#सुरेश_गुप्ता
स्वरचित

