सवाल सवाल सवालों में उलझते गए।
शख्शियत भूला बेकार में उलझते गए।

क्या सोचा क्या चाहत पाल बैठे मन मे।
क्या आज सवाल हमसे भी बड़े हो गए।

तर्को की दुनिया इस दुनिया से बड़ी है।
रिश्ते बनाते तुम भूलभुलैया में खो गए।

मामला जब तर्क की कसौटी पर आया।
मोहब्बत नही तब हथौड़े के वार आए।

आप बहादुरी से लंबा सवाल कर बैठे।
बहादुरी से जवाब देते या बचाव करते।

आओ मिलते जाओ बस खुले दिल से।
सवाल से बाल की खाल न निकालते।

#सुरेश_गुप्ता
स्वरचित