पंच गंगा घाट पर गुरु रामानंद मिले।
गुरु मुख से जब राम नाम मंत्र लिए।
गृहस्थ से एक महा कवि प्रकट हुए।
बुनक़र नाम कबीर वे विश्व गुरु हुए।

मुल्ला मौलवी पंडित कौन बच सका।
अल्लाह भगवान में भेद न कर सका।
हवा पानी सरद गरम एक सा मिला।
ईश्वर भेद न करे बंदा क्यो कर रहा।

क्लिष्ठ पूजा इबादत जनता को नही।
सरल पूजा इबादत का मार्ग बता गए।
सामाजिक कुरीतियों पर चोट करते।
किसका डर जो कहे तख्त हिला गए।

 कबीर ज्ञानमार्ग शाखा में गंगा बहाए।
क्या हिन्दू क्या मुस्लिम सब बहते गए।
कुरीति पर चोट से आदर्श समाज बने।
कबीर संप्रदाय के महान प्रवर्तक हुए।