समयोचित संस्कार's image
422K

समयोचित संस्कार


जीवन केल पौध सा परत दर परत चढ़ा
जिया जो पल वह नई परत चढाता गया

खट्टे मीठे पलो की मैं माला पिरोता गया
समीक्षा में परत दर परत उतार भी रहा

कहते है बुजुर्ग धर्म ग्रंथ शाश्वत सत्य है 
जिसकी शिक्षा काल खंड में अक्षुण्ण है

समय बदलता रहा पर धर्म नही बदला
संकीर्ण मनोवृति ने धर्म का ह्रास किया
Read More! Earn More! Learn More!