स्वच्छ छबि ऐसा रहा है सत्ता वर्चस्व।
दुराचार आरोप और पुलिस व्यवहार।
सर्वोच्च न्यायविद लिखते प्राथमिकी।
सता विन्यास का हो रहा अद्भुत राज।

सम्भव नही ठुकरा पाती अध्यक्ष पद।
नारी होकर नारी का उत्पीड़न करती।
क्या जायज ठहराने लगे वे बलात्कार।
देश छबि विन्यास में लगाती चारचांद।

सत्ता गोद में बाहुबली हुआ है विराट।
बेटियों को गोद मे बिठाता है वो बाप।
बेजा हरकतो से नही वो आता बाज।
देश शर्मसार हुआ देख बेटी विन्यास।

यत्र नार्यस्तु देश मे हिन्दू जो हुए हम।
नया धर्म लिखते रहे छोड़ा इतिहास।
सरेआम लुटती जाए या हो नीलाम।
हुआ सभ्य समाज का ऐसा विन्यास।