कानून बनाते रहे निर्भयाएं यूँही जलील होती
मर गई हमारी आत्मा निर्भया तू शोक करना
आततायी मार डाले तू घुट घुट कर मर जाना
रह रही लाशों के बीच गिद्दों का साम्राज्य यहां
कानून का जनाना उठ रहा है बीच चौराहे में
निर्भया गम न करे समाज की इस्मत लुट रही
नारी सन्मान पे आप भाषण अच्छा कर देना
निर्भया की सिसकियो को साज समाज देगा
देश मेरा रेपिस्ट का स्वर्ग कानून मजाक होगा
कानून बनानेवाला सजायाफ्ता को छोड़ देगा
कौन बने आवाज़ उसे स्वर्ग मे सिसकना होगा
बेबसी ऐसी समाज रेपिस्ट का सन्मान देखेगा
नारी सन्मान का उच्च आदर्श धर्म मे सदा रहा
बहन बेटियों की इज्जत में भी धर्म फर्क करेगा
सरेआम गिद्ध नोचेंगे समाज मे दावतेजश्न होगा
कोने में आंसू बहाना पर लबो को न खोल देना
निर्भया की शोकसभा मे जा केंडल लगा आना
आग लगी है दूर बस्ती में तुम तो महफूज रहना
झांक आना कभी अतीत में समाज बने क्यों थे
आपस में ताकत बनकर दरिंदो से लडे क्यों थे

