शीश झुके बुजुर्ग चरणों मे भाल ऊंचा हो।
सजा दो घर को संस्कारो से तुम हिन्दू हो।

स्वस्थ पके स्वस्थ खाए जंकफूड छोड़ दो।
भुला दो वैरभाव अपनो में मतभेद न हो।

मोबाइल यूज कम हो अपनो को वक्त दो।
सजा दो घर मेहमानों से सदा स्वागत हो।

लोभ लालच न हो एक दूजे की ताकत हो।
छोड़ दो ईर्ष्या द्वेष अपनो में बस प्यार हो।

घर की चारदीवारी में रहते सब अपने हो।
सजा दो चेहरे पे मुस्कान सुखद मिलन हो।

#सुरेश_गुप्ता
स्वरचित