आया आज राखी का त्यौहार।
रेशम की डोर लिए हुए तैयार।
बहना बोले भैया दे देना प्यार।
जीवनभर रक्षा का दे उपहार।
नेताजी आए मन मे भर प्यार।
आज रो रो करते रहे है पुकार।
मुश्किल था जीना देते दुत्कार।
जब मिलने गए खाई फटकार।
अब आये है जनता के दरबार।
भूलचुक माफ आप है सरकार।
हाथ जोड़ घूमते लोगों के द्वार।
हमें है आपके वोट की दरकार।
ईडी धमकाती डंडा बजा रही।
पीछे से वे आकर दे पुचकार।
डरो नही तुम ये गली है हमार।
डॉग डरावना ये है हमारा यार।
विपक्ष हाथ लेके रेशम के तार।
जा खड़ा है आज ईडी के द्वार।
नैया हमारी अटकी है मंझधार।
नैया पार करा न छोड़ पतवार।
निकले आज ले रेशम की डोर।
अपना उल्लू सीधा करे ये चाह।
स्वार्थ से मानव हुआ दृष्टिहीन।
रिश्तों की आड़ में करे व्यापार।
#सुरेश_गुप्ता
स्वरचित

